Rigveda, Yajurveda, Samaveda and Atharvaveda

Vedas in Hindi - संपूर्ण वेद कथा !

By 00:01
परिचय - वेद दुनिया के लगभग सबसे पुराने लिखित दस्तावेज हैं। वेद ही हिन्दू धर्म के सर्वोच्च और सर्वोपरि धर्मग्रन्थ हैं। सामान्य भाषा में वेद का अर्थ है "ज्ञान"। वस्तुत: ज्ञान वह प्रकाश है जो मनुष्य-मन के अज्ञान-रूपी अन्धकार को नष्ट कर देता है। वेदों को इतिहास का ऐसा स्रोत कहा गया है जो पोराणिक ज्ञान-विज्ञान का अथाह भंडार है। वेद शब्द संस्कृत के विद शब्द से निर्मित है अर्थात इस एक मात्र शब्द में ही सभी प्रकार का ज्ञान समाहित है। प्राचीन भारतीय ऋषि जिन्हें मंत्रद्रिष्ट कहा गया है, उन्हें मंत्रो के गूढ़ रहस्यों को ज्ञान कर, समझ कर, मनन कर उनकी अनुभूति कर उस ज्ञान को जिन ग्रंथो में संकलित कर संसार के समक्ष प्रस्तुत किया वो प्राचीन ग्रन्थ "वेद" कहलाये। एक ऐसी भी मान्यता है कि इनके मन्त्रों को परमेश्वर ने प्राचीन ऋषियों को अप्रत्यक्ष रूप से सुनाया था। इसलिए वेदों को श्रुति भी कहा जाता है। 
          इस जगत, इस जीवन एवं परमपिता परमेश्वर; इन सभी का वास्तविक ज्ञान "वेद" है। 

वेद क्या हैं?
           वेद भारतीय संस्कृति के वे ग्रन्थ हैं, जिनमे ज्योतिष, गणित, विज्ञान, धर्म, ओषधि, प्रकृति, खगोल शास्त्र आदि लगभग सभी विषयों से सम्बंधित ज्ञान का भंडार भरा पड़ा है। वेद हमारी भारतीय संस्कृति की रीढ़ हैं। इनमे अनिष्ट से सम्बंधित उपाय तथा जो इच्छा हो उसके अनुसार उसे प्राप्त करने के उपाय संग्रहीत हैं। लेकिन जिस प्रकार किसी भी कार्य में महनत लगती है, उसी प्रकार इन रत्न रूपी वेदों का श्रमपूर्वक अध्यन करके ही इनमे संकलित ज्ञान को मनुष्य प्राप्त कर सकता है। 

वेद मंत्रो का संकलन और वेदों की संख्या 
            ऐसी मान्यता है की वेद प्रारंभ में एक ही था और उसे पढने के लिए सुविधानुसार चार भागो में विभग्त कर दिया गया। ऐसा श्रीमदभागवत में उल्लेखित एक श्लोक द्वारा ही स्पष्ट होता है। इन वेदों में हजारों मन्त्र और रचनाएँ हैं जो एक ही समय में संभवत: नहीं रची गयी होंगी और न ही एक ऋषि द्वारा। इनकी रचना समय-समय पर ऋषियों द्वारा होती रही और वे एकत्रित होते गए। 
           शतपथ ब्राह्मण के श्लोक के अनुसार अग्नि, वायु और सूर्य ने तपस्या की और ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को प्राप्त किया। 
प्रथम तीन वेदों को अग्नि, वायु और सूर्य से जोड़ा गया है। इन तीनो नामों के ऋषियों से इनका सम्बन्ध बताया गया है, क्योंकि इसका कारण यह है की अग्नि उस अंधकार को समाप्त करती है जो अज्ञान का अँधेरा है। इस कारण यह ज्ञान का प्रतीक बन गया है। वायु प्राय: चलायमान है, उसका काम चलना (बहना) है। इसका तात्पर्य है की कर्म अथवा कार्य करते रहना। इसलिए यह कर्म से सम्बंधित है। सूर्य सबसे तेजयुक्त है जिसे सभी प्रणाम करते हैं, नतमस्तक होकर उसे पूजते हैं। इसलिए कहा गया है की वह पूजनीय अर्थात उपासना के योग्य है। एक ग्रन्थ के अनुसार ब्रम्हाजी के चार मुखो से चारो वेदों की उत्पत्ति हुई। 

१. ऋग्वेद 
ऋग्वेद सबसे पहला वेद है। इसमें धरती की भौगोलिक स्थिति, देवताओं के आवाहन के मंत्र हैं। इस वेद में 1028 ऋचाएँ (मंत्र) और 10 मंडल (अध्याय) हैं। ऋग्वेद की ऋचाओं में देवताओं की प्रार्थना, स्तुतियाँ और देवलोक में उनकी स्थिति का वर्णन है।

२. यजुर्वेद 
यजुर्वेद में यज्ञ की विधियाँ और यज्ञों में प्रयोग किए जाने वाले मंत्र हैं। यज्ञ के अलावा तत्वज्ञान का वर्णन है। इस वेद की दो शाखाएँ हैं शुक्ल और कृष्ण। 40 अध्यायों में 1975 मंत्र हैं।


३. सामवेद 
साम अर्थात रूपांतरण और संगीत। सौम्यता और उपासना। इस वेद में ऋग्वेद की ऋचाओं (मंत्रों) का संगीतमय रूप है। इसमें मूलत: संगीत की उपासना है। इसमें 1875 मंत्र हैं।


४. अथर्ववेद 
इस वेद में रहस्यमय विद्याओं के मंत्र हैं, जैसे जादू, चमत्कार, आयुर्वेद आदि। यह वेद सबसे बड़ा है, इसमें 20 अध्यायों में 5687 मंत्र हैं।

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जीवन का सबसे बड़ा सच और रहस्य - मौक्ष, पुनर्जन्म और मौत..

By 22:37
अक्सर लोग कहते हैं की जीवन का सबसे बड़ा सत्य है - मौत, अगर हाँ तो उसके बाद क्या? स्वर्ग और नर्क क्या हैं? इंसान मौक्ष की प्राप्ति कैसे करता है?

हिन्दू धर्म और विश्व के विभिन्न धर्मो और उनके महान प्राचीन ग्रंथो में जीवन के रहस्य और स्वर्ग जैसी बातो का वर्णन किया गया है जिसमे काफी बातें एकसमान हैं।  इन ग्रंथो का सारा ज्ञान देवताओं द्वारा खुद दिया गया था।

पुनर्जन्म चक्र - इन ग्रंथों के मुताबिक नर्क यहीं है पृथ्वी पर।  हम सब पुनर्जन्म के चक्र में फसे हुए हैं। हमें करोड़ों बार जन्म और मरण की पीड़ा से गुजरने के बाद इंसान का जन्म मिलता है जैसा की हिन्दू धर्म में भी वर्णित है।  मतलब हमें हजारों सालों बाद मौक्ष का मौका मिलता है इंसानी जीवन के रूप में।

स्वर्ग, नर्क और मौक्ष - ये इंसानी जीवन हमें एक ऐसे मौके के रूप में मिलता है जिसमें हम इस पुनर्जन्म चक्र रुपी नर्क से मुक्ति(मौक्ष) पा सकें।  अपने इंसानी जीवन में सफल होने पे हर मनुष्य स्वर्ग का हक़दार बनता है और इसी को हम मौक्ष भी कहते हैं, मतलब पुनर्जन्म चक्र से मुक्ति, अन्यथा मनुष्य को जन्म और मृत्यु की पीड़ा का सफर जारी रखना पड़ता है क्योंकि आत्मा तो अमर होती है।

मौक्ष की प्राप्ति - हमारे जीवन से तुलना की जाए तो आत्मा अनंत तक रहती है, मतलब जो व्यक्ति स्वर्ग में जाता है वो वहां अनंत तक रहता है।  इसलिए अनंत तक आनंदमयी रूप से स्वर्ग में रहने के लिए किसी को भी अपने लालच और कामनाओं पे काबू करना आवश्यक है।  इसका मतलब साफ़ है की स्वर्ग में जाने और मौक्ष की प्राप्ति के लिए वही व्यक्ति योग्य होगा जो अपने लालच और कामनाओं पर काबू पा ले और सुख-दुःख को एकसमान समझे।
इंसान की जिंदगी में इतने लक्ष्य होते हैं की वो कभी खुश ही नहीं रह पाता।  ९०% तनाव और दुःख सिर्फ हमारे सोचने के तरीके और जीवनशैली पर निर्भर करता है। सिर्फ भारत में ही हर साल हज़ारों लोग कुपोषण और भूक से मर जाते हैं, कोई ज़रा उनसे पूछे की उनके जीवन का क्या लक्ष्य है तो उनका बस एक ही जवाब होगा - पेट भर के खाना।
ये बात भी सच है की अगर इंसान में आगे बढ़ने की चाह न होती तो आज हम अपने जीवन में इतनी तरक्की और सुख सुविधाएं न जुटा पाते, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की हम अपनी इंसानियत से ऊपर उठकर अपने लालच और कामनाओं को ही अपनी जिंदगी बना लें, क्योंकि इनकी कोई सीमा नहीं होती जिस्से हमें केवल असन्तुष्टि ही प्राप्त होती है।



         एक और बात जो की उतनी ही महत्वपूर्ण है, ईश्वर ने हमें आँखें, कान और दिमाग दिया है ताकि हम सच-झूट और सही-गलत का फर्क कर सकें, इसलिए कोई भी और किसी की भी बात मानने से पहले खुद उसको सत्यापित जरूर करना चाहिए।

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हिन्दू धर्म और कलयुग

By 22:37
सबसे बड़ा धर्म है इंसानियत का और इसमें कोई शक नहीं है की इस धर्म को मानने वाले ही कुछ सभ्य लोगों ने निर्माण किया होगा महान हिन्दू धर्म का, ताकि ज्ञान रुपी प्रकाश पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहे.…
हिन्दू धर्म को दुनिया का सबसे पुराना धर्म माना गया है। हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रन्थ ज्ञान का अथक भंडार हैं।

इन सबके  बावजूद भारत और बाकि दुनिया में लालच, द्वेष और पाप बढ़ता ही जा रहा है, तो क्या ये कलयुग की शुरुआत है?
हिन्दू धर्म के अनुसार कलयुग में इस दुनिया का अंत होगा जब धरती पाप का बोझ सह नहीं पायेगी। दुनिया में क्या-क्या चल रहा है अगर गौर किया जाये  इस्से तो लगता है की कलयुग की शुरुआत हो चुकी है!
लोग लालच में गलत काम किये जा रहे है, अपने लालच के आगे ऐसे लोग सही गलत कुछ नहीं सोचते, तो बताइये इंसान और जानवरों में फर्क ही क्या रह गया? इंसान की बदौलत ही हमारी धरती और पर्यावरण लगातार विनाश की और बढ़ रहे हैं।

हिन्दू धर्म के अनुसार कलयुग में जब पाप हद से ज्यादा बढ़ जायेगा तब कल्कि भगवान स्वयं आएंगे इस धरती को पापमुक्त करने।
ईसाईयों की पवित्र बाइबिल में भी कुछ ऐसा ही जिक्र है की एक वक़्त ऐसा आएगा जब धरती पे पाप सर्वोच्च अवस्था पे होगा तब स्वयं इसा-मसीह धरती पर दोबारा लौट के आएंगे।


वैसे ये बात तो निश्चित है की दुनिया की कोई भी चीज़ अमर नहीं है, हमारे चाँद और सूरज भी एक न एक दिन ख़त्म हो जायेंगे। मतलब इस दुनिया को तो एक न एक दिन ख़त्म होना ही है पर ये देखना दिलचस्प होगा की ईश्वर खुद आके ऐसा करते हैं या फिर सब प्राकृतिक रूप से धीरे-धीरे होगा।

आने वाले वक़्त में हो तो ये भी सकता है की किसी और गृह पे रहने वाले परजीवी पृथ्वी को खोज लें, अगर वो ऐसा हमसे पहले कर लेते हैं तो इतना तो साफ़ होगा की वो हमसे कहीं ज्यादा उन्नत हैं, और हो सकता है हम उन्हें भगवन समझ बैठें। ऐसे में विनाश की और बढ़ती हमारी धरती और प्रकृति को बचाने में वो हमारी मदद करेंगे या या हमारा ही सफाया कर देंगे ये तो वक़्त ही बताएगा।

इन दोनों बातों में से जो भी हो, हिन्दू धर्म और बाकि धर्मो द्वारा की गयी भविष्यवाणी तो सच हो ही जाएगी।



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